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आने वाले विश्व की तस्वीर बदल सकता है तकनीकी शीतयुद्ध

तकनीक का शीत युद्ध
अमरीका और चीन के झंडे

दुनिया अब चौथे ओद्योगिक क्रांति में प्रवेश कर रही है।  बुद्धिजीवियों का मत है, जो देश इस क्रांति पर विजय पा लेगा वह भविष्य को विजय कर लेगा। डाटा और आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस की उन्नति आने वाले समय को व्यापक तौर पर प्रभावित करेगी। इसे देखते हुए दुनिया की बड़ी महाशक्तियां अपनी कमर कस रहीं हैं। चाइना अपनी जीडिपी का बड़ा हिस्सा तकनीक के क्षेत्र में निवेश कर रहा है। वहीं दूसरी ओर अमरीका भी पीछे नहीं है। दोनों ही देशो के बीच एक-दूसरे से होड़ लगी हुई है आगे बढ़ने की।

इस मद्देनजर दोनों ही देशों के बीच तकनीकी शीत युद्ध की शुरुवात हो चुकी है। हाल ही में कुछ समय पहले अमरीका ने चाइना पर यह आरोप लगाया था कि वह अमरीका की इंटलेक्चुअल प्रोपर्टी को चुरा रहा है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि जो भी बड़ी कंपनी चाइना में अपना प्लांट खोलती है। उसे अपनी तकनीक को चाइना के साथ साझा करना पड़ता है। यही एक बड़ा कारण है, जिसके चलते एप्पल, सैमसंग या किसी अन्य कंपनी के मोबइल फोन्स, गैजेट्स आदी के क्लोन चाइना बना कर उसे सस्ते दामों पर दुनिया भर में बेचता है। इसके अलावा चाइना पर यह भी आरोप लगते आए हैं कि वह करेंसी मेनुपुलेसन करके व्यापार में लाभ उठाता है।


यही एक बड़ा कारण रहा, जिसके चलते अमेरिका ने चीन के विरुद्ध ट्रेड वार शुरू कर दिया। उसने 4 बड़े स्तरों पर चीन से अमेरिका आ रहे प्रोडक्ट पर बंदिशें लगाई। इसके बाद अमेरिका ने चीन की नामी कंपनी huwai को देश में बैन कर दिया। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि आने वाले समय में huwai 5जी का एक बहुत बड़ा सेटअप लगाने वाली थी। अमेरिका ने huwai कंपनी पर एक बड़ा आरोप लगाते हुए कहा कि यह कंपनी निजी डेटा को चोरी करती है। इससे आने वाले भविष्य में एक बहुत बड़ा सिक्योरिटी थ्रेट हमें पहुँच सकता है। इसके साथ ZTEजो कि चीन की बहुत बड़ी टेलीकम्युनिकेशन कम्पनी है उसे भी अमेरिका ने अपने देश में बैन कर रखा है।

अमेरिका के बाद ब्रिटेन और ऑस्ट्रेलिया ने भी अपने देश में huwai को बैन कर दिया। भारत में अभी इसको लेकर कोई खास निर्णय नहीं लिया गया है। भारत में एयरटेल, वोडाफोन और आईडीया जो कि बड़ी टेलिकॉम इंडस्ट्रीज हैं वह भी भारी मात्रा में इक्विपमेंट हुवाई से खरीदती हैं। आने वाले समय में 5जी का प्रवेश देश में होने जा रहा है। ऐसे में जिओ ही एक ऐसी कंपनी है जो 5जी के उपकरण खुद से बनाती है। वहीं दूसरी ओर वोडाफोन, एयरटेल और आईडिया के हालात ठीक नहीं है। अगर भारत में हुवाई को बैन किया जाता है तो एक संभावना यह बनती है कि जिओ की मोनोपोली देश की टेलीकॉम इंडस्ट्री में आ सकती है। जो कि किसी भी लिहाज से सही नहीं है।

चाइना में पारदर्षिता नहीं है। इस कारण उस पर कई बार आरोप लगते आएं है कि उसके सभी एप चाइना की सेना पीपल लिबरेशन आर्मी के लिए काम करती हैं। दुनिया भर के यूजर्स का निजी डेटा उससे साझा करती है। यही एक बड़ा कारण रहा जिसके चलते भारत ने चाइना के 59 एप्लिकेशन को देश में बैन कर दिया। जिसमें टिकटोक, यू.सी ब्राउज़र, शेयरइट प्रमुख हैं

अमेरिका और चाइना के मध्य शुरू हुए इस शीत युद्ध में धीरे धीरे और भी देश जुड़ते जा रहें हैं। आने वाले समय में इसकी सम्भावित तस्वीर क्या होगी यह तो कहना अभी मुश्किल है। पर आने वाले विश्व को यह हलचल एक नए सिरे से रूपांतरित जरूर करेगी।

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