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हम कभी इजराइल को एक देश के रूप में स्वीकार नहीं करेंगे : पाकिस्तान

इमरान खान 

हाल ही में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने यह बयान दिया कि "हम कभी इजराइल को एक देश के रूप में स्वीकार नहीं करेंगे। हमारे पहले कायदेआजम मोहम्मद अली जिन्ना ने शुरुवात में ही हमारा रुख निश्चित कर दिया था कि जब तक फिलिस्तीनियों को उनका पूरा हक़ नहीं मिल जाता तब तक हम इजराइल को कभी भी एक देश के रूप में स्वीकृत नहीं करेंगे"। उन्होंने अपने इंटरव्यू में यह भी कहा कि "इजराइल और फिलिस्तीन का विवाद भारत और कश्मीर विवाद के जैसा है"। गौरतलब बात यह है कि कुछ समय पहले ही इब्राहीम एकॉर्ड समझौते के तहत संयुक्त अरब अमीरात ने काफी लंबे समय के बाद, इजराइल को एक देश के रूप में स्वीकृत किया है। उसने यह भी कहा है कि आने वाले वक़्तों में हम इजराइल के साथ विभिन्न मसलों पर आर्थिक, राजनीतिक और कूटनीतिक साझेदारी करेंगे।


बयान के पीछे की वजह

आपको बता दें कि इजराइल और फिलिस्तीन विवाद को लेकर ज़्यादातर इस्लामिक देश इजराइल को एक देश नहीं मानते हैं। संयुक्त अरब अमीरात और अमेरिका के व्यापारिक दृष्टि से काफी अच्छे रिश्ते हैं। वहीं दूसरी ओर डोनाल्ड ट्रम्प की सरकार में इजराइल और अमेरिका के बीच करीबियां बढ़ी हैं। इस कारण संयुक्त अरब अमीरात और इजराइल का करीब आना स्वाभाविक है। वैश्विक सन्दर्भ में यू.ए.ई(UAE) द्वारा इजराइल को एक राष्ट्र के रूप में चिन्हित करना आने वाले समय में नई राजनीति को जन्म देगा। इसी को लेकर पाकिस्तान के कायदे आजम ने यह बयान दिया है। पाकिस्तान के प्रधान मंत्री ने अपने इंटरव्यू में यह भी कहा कि यू.ए.ई(UAE) के इस फैसले के चलते भविष्य में कई दूरगामी परिणाम देखने को मिलेंगे

इब्राहीम एकॉर्ड समझौता

डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा है कि वह इब्राहीम एकॉर्ड समझौते को बढ़ाना चाहते हैं। इसके तहत उन्होंने सऊदी अरब से भी यह इच्छा जताई है कि वह इजराइल को एक देश के रूप में स्वीकार करे। जवाब में सऊदी अरब ने कहा है कि "एक बार अगर इजराइल में शांति स्थापित होती है तो हम जरूर इजराइल को एक कंट्री के रूप में स्वीकार करेंगे। इसके अलावा ओमान, मोरक्को और बहरीन ये तीन इस्लामिक देश जल्द ही इजराइल को अपनी ओर से एक देश के रूप में स्वीकार कर सकते हैं। 

आपको बता दें कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय में देश के रूप में स्वीकार करने से अभिप्राय एक-दूसरे देश के वजूद और अस्तित्व को मानने से है। इससे अंतरराष्ट्रीय संबंध दोनों देशों के बीच स्थापित होते हैं। इस कारण दोनों देशों के लोग वीजा के सहारे एक दूसरे के देश में आ जा सकते हैं। कई इस्लामिक देश इजराइल के वजूद को नहीं मानते हैं। इस कारण इजराइल के नागरिक दूसरे इस्लामिक देशों में आ जा नहीं सकते हैं। वहीं इस्लामिक देश के नागरिक इजराइल में आ जा नहीं सकते। इनके मध्य किसी भी प्रकार का राजनीतिक, कूटनीतिक और आर्थिक सहयोग भी नहीं होता है।


भारत पर इसका प्रभाव

गौरतलब बात यह है कि भारत को अक्सर यह डर बना रहता है कि रूस जो हथियार भारत को बेच रहा है। कहीं उसे वह पाकिस्तान को न बेच दे। द डिप्लोमेट के एक आर्टिकल की माने तो आने वाले समय में रूस पाकिस्तान को कई उन्नत हथियार बेच सकता है। इससे सम्भवतः भारत और पाकिस्तान के बीच के शक्ति संतुलन पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। 

पाकिस्तान ने इजराइल को लेकर जो बयान दिया है। इससे साफ संकेत जाते हैं कि इजराइल और पाकिस्तान के रिश्ते और भी ज्यादा बिगड़ेंगे। भारत अब आश्वस्त हो सकता है कि आने वाले समय में इजराइल किसी भी प्रकार का उन्नत हथियार पाकिस्तान को नहीं बेचेगा। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि इजराइल आर्म्ड हथियारों का बड़ा सप्लायर देश है। आने वाले समय में इजराइल का यह क्षेत्र अंतराष्ट्रीय बाजार में और भी ज्यादा समृद्ध होगा। इस संदर्भ में भारत बिना किसी डर के आने वाले बीस से तीस सालों के लिए इजराइल के साथ कई डिफेंस एग्रीमेंट कर सकता है। 


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