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जम्मू-कश्मीर कल और आज

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डल झील

भारत सरकार ने पिछले वर्ष 5 अगस्त, 2019 को जम्मू एवं कश्मीर को विशिष्ट रियायत देने वाले विभेदकारी अनुच्छेद 370 का खात्मा किया था। इसके पश्चात केंद्र सरकार ने पूरे जम्मू कश्मीर को दो केंद्र शासित प्रदेशों (जम्मू एवं कश्मीर और लद्दाख) में बांट दिया।

जम्मू कश्मीर के लिए यह बदलाव का दौर है। पिछले 69 सालों के दौरान जम्मू कश्मीर के साथ खिलवाड़ हुआ। राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं और आतंकवाद ने जम्मू कश्मीर को अपंग बनाए रखा। अब जबकि अनुच्छेद 370 को खत्म हुए एक साल बीत चुका है। तो आइए जानते हैं कि इस दौरान कश्मीर ने क्या खोया? और क्या पाया है? -


विकास के नए क्षेत्र 

अनुच्छेद 370 और 35A की समाप्ति से पहले भारत सरकार पूरी आजादी के साथ जम्मू कश्मीर में विकास परियोजनाओं पर कार्य नहीं कर पा रही थी। अब जब की अनुच्छेद 370 खत्म हो चुका है तो सरकार पूरी संलग्नता के साथ कश्मीर में बड़े बड़े प्रोजेक्ट की शुरुवात जोर शोर से कर रही है। भारत का सबसे ऊंचा रेलवे ब्रिज चिनाब नदी के ऊपर बन रहा है। अगले साल तक यह बन कर पूरी तरह से तैयार हो जाएगा। यह रेलवे ब्रिज, जम्मू कश्मीर घाटी को पूरे भारत से जोड़ देगा। इसके चलते आप किसी भी रेलवे स्टेशन से कश्मीर में सीधे आ जा सकेंगे।

हाल ही में जुलाई 2020 में भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने 6 नए ब्रिजों का शुभारंभ किया। चापुरकंडी इलेक्ट्रिसिटी प्रोजेक्ट और इरीगेशन प्रोजेक्ट जो पचास सालों से रुका हुआ था। अब उसे आगे बढाया जा रहा है। भारत सरकार ने 85 जनहित योजनाओं को जम्मू कश्मीर में लागू कर दिया है। इसमें अटल पेंशन योजना, पी.एम किसान पेंशन आदि प्रमुख हैं। सरकार ने किसानों के लिए छः हज़ार करोड़ का मल्टी पर्पज प्रोजेक्ट शुरू किया है। किसानों के लिए विशेष पैकेज दिए जा रहें हैं। जम्मू कश्मीर और लद्दाख में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए सरकार आने वाले दिनों में विशेष प्रोजेक्ट को लांच कर सकती है।

आंकड़ों की माने तो जम्मू कश्मीर में अनुच्छेद 370 खत्म होने के बाद माइनॉरिटी लोगों को दी जाने वाली स्कॉलरशिप में 262 प्रतिशत की दर से वृद्धि हुई है। रोजगार के नए अवसर खुल रहें हैं। पांच बड़ी कॉर्पोरेशन्स यहां पर ऊर्जा विभाग खोलने जा रहीं हैं। इससे चार हजार युवाओं को नई नौकरियां मिलेगी। भारत सरकार ने कश्मीर को एक हजार करोड़ का विशेष पैकेज दिया है। सड़कों का विकास तेजी से हो रहा है। कश्मीर में धीरे धीरे निवेश की शुरुवात हो चुकी है। नई नई कंपनियों का आगमन हो रहा है। इसके चलते दस हज़ार नई नौकरियां आने वाले समय में युवाओं को मिलेंगी। कहा यह भी जा रहा है कि आने वाले दौर में पच्चीस हज़ार नौकरियों के पोस्ट को भरा जाएगा। जम्मू कश्मीर में अब सातवां वेतन आयोग लागू हो चुका है। इसके चलते तीन लाख सरकारी कर्मचारियों को इसका सीधा लाभ  पहुंच रहा है। अब तक चार हज़ार से भी ज्यादा युवाओं को नई नौकरियां मिल चुकी हैं।

अनुच्छेद 370 के खात्मे से पहले, पाकिस्तान से आये शरणार्थियों के साथ जम्मू कश्मीर की राज्य सरकार का व्यवहार ठीक नहीं था। शरणार्थीयों को दिए जाने वाले अधिकार से वे लोग वंचित थे। अब भारत सरकार शरणार्थियों के परिवार को साढ़े पांच लाख का सलाना आर्थिक मदद दे रही है। उन्हें अधिवास पत्र दिया जा रहा है। इसके अलावा जो भारतीय कश्मीर में बेगानो की भांति रहते थे। उन्हें भी भारत सरकार अधिवास पत्र (डोमिसाइल) दे रही है। अब तक करीबन साढ़े चार लाख से ऊपर अधिवास पत्र पूरे जम्मू कश्मीर में लोगो को दिए जा चुके हैं। इससे इन लोगों को रोजगार मिलने में आसानी होगी।

1990 के दौरान कश्मीर में चरमपंथ का उबाल था। इस कारण 1991 में कश्मीरी पंडितों का नरसंहार होता है। मजबूरन उन्हें वहां से भागकर भारत के बाकी हिस्सों में पलायन करना पड़ा। अब जबकि अनुच्छेद 370 का खात्मा हो चुका है तो धीरे-धीरे कश्मीरी पंडितों को कश्मीर में पुनर्वास करवाया जा रहा है। 


आतंकवाद की मौजूदा स्थिति

जम्मू कश्मीर में लंबे समय से आतंकवाद और चरमपंथ का प्रभाव रहा है। अनुच्छेद 370 के खात्मे के बाद से इनका प्रभाव तेजी से कम हो रहा है। आंकड़ों की माने तो 2019 के मुकाबले 2020 में 36 प्रतिशत आतंकवादी घटनाओं में कमीं आई है। मिनिस्ट्री ऑफ होम अफेयर (MHA) की रिपोर्ट की माने तो 2020 में जनवरी 1 से लेकर 15 जुलाई तक 136 आतंकवादियों को सुरक्षा बलों ने मार गिराया। 2019 में 51 ग्रेनेड अटैक हुए थे। 2020 में अब तक केवल 21 ग्रेनेड हमले हुए हैं। 

2019 में हमारे 75 जवान और 23 नागरिक मारे गए थे। वहीं 2020 में अब तक हमारे 35 जवान मारे गए हैं। आईडी हमलों की संख्या में कमी आई है। इस साल 110 लोकल आतंकवादियों को सुरक्षा बलों ने मार गिराया। आतंकवादियों के बड़े बड़े कमांडर्स को ढूंढ ढूंढ कर उन्हें मौत के घाट उतारा जा रहा है। इसमें रियाज नायकु, करी असीर और अंसल गजवार प्रमुख थे, जिन्हें सुरक्षा बलों ने मार गिराया।

राहत देने वाली खबर यह है कि कश्मीर के 40 प्रतिशत युवाओं का आतंकवादी घटनाक्रम में भागीदारी कम हुई है। नौकरियों के नए मार्ग कश्मीर में खुल रहें हैं। इस कारण कश्मीर के युवा जो कभी पैसों की तलाश में भारत के सुरक्षाबलों पर पत्थर बाजी करते थे। उन्हें धीरे धीरे अब रोजगार मिलने लगा है। उनका चरमपंथ से जुड़ाव टूट रहा है। वे अब धीरे धीरे आर्थिक नजरिये से सशक्त हो रहें हैं।


कानूनो में नए बदलाव 

जम्मू कश्मीर में 354 राज्य कानून लागू हुआ करते थे। अनुच्छेद 370 के खात्मे के बाद इनमें से 164 कानूनों को खत्म कर दिया गया। 138 कानूनों में बदलाव किये गए और 70 कानून केंद्र सरकार ने अपनी तरफ से लागू किये। जम्मू कश्मीर को दो केंद्र शासित राज्यों (जम्मू एवं कश्मीर और लद्दाख) में बांटा गया। इसके चलते केंद्र सरकार का सीधा नियंत्रण दोनों जगह पर हो गया। इसके अलावा दोनों ही केंद्र शासित प्रदेशों में सरकार के कई प्रगतिशील कानून भी लागू हुए।

इनमें अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति एट्रोसिटी एक्ट 1954, विस्सल ब्लोअर प्रोटेक्शन एक्ट 2014, राष्ट्रीय आयोग सफाई कर्मचारी एक्ट 1994 ( बता दें कि अनुच्छेद 370 की समाप्ति से पहले जम्मू कश्मीर में वाल्मीकि समुदाय और सफाई कर्मचारियों के पास कोई अधिकार नहीं था। साफ साफाई करने के अलावा वे राज्य सरकार की किसी भी गतिविधि में शामिल नहीं हो सकते थे।) इस एक्ट के आने के बाद, जम्मू कश्मीर के सफाई कर्मचारियों को वह सभी अधिकार मिलने लगे हैं, जो कि किसी आम भारतीय नागरिक को मिलते थे।

कहते हैं कि जम्मू कश्मीर स्विट्जरलैंड से भी ज्यादा खूबसूरत है। बदकिस्मती से इसकी खूबसूरती पर लंबे समय से गुम अंधेरा छाया रहा। अब कश्मीर के लिए नए दरवाजे खुल रहें हैं, नई उम्मीदें जन्म ले रहीं हैं, नई आशाएं हैं। अब भविष्य ही यह तय करेगा कि जम्मू कश्मीर के मुस्तकबिल में क्या लिखा है.........

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