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जो दुनिया को हँसाता है वो भगवान के बाद होता है: किशोर कुमार

किशोर-कुमार
किशोर कुमार

आज एक ऐसी शख़्सियत का जन्मदिन है, जिसने दुनिया को खुलकर जीने का नुस्खा सीखाया। उस शख़्सियत का नाम 'किशोर कुमार' है। वो न सिर्फ़ एक कलाकार, लेखक, निर्माता थे बल्कि काफ़ी अच्छे गीतकार भी थे। पूरी दुनिया 'किशोर दा के गाने' को न सिर्फ़ सुनती है बल्कि उन गानों में मदमस्त हो नाचती और झूमती है। फिल्मों में उनका किरदार काफी जीवंत होता था। उनकी अदाकारी अक्सर दर्शकों को ठहाके लगाने पर मजबूर कर देती थी।

सन् 1929 को मध्यप्रदेश के खंडवा में जन्में किशोर कुमार के बचपन का नाम 'आभास कुमार गांगुली' था। उनको किशोर कुमार नाम से फिल्मी जगत में जाना जाता था। वह चाहते थे कि उन्हें दुनिया उनकी आवाज से जाने। उनको शुरुआत में अपने बड़े भाई अशोक कुमार के कहने पर फ़िल्मों में एक एक्टर के तौर पर काम करना पड़ा। दुनिया ने किशोर की हरफनमौला कलाकारी को काफ़ी प्यार दिया। अक्सर लोग उनकी अदाकारी की नकल भी करते थे। उनका जादू लोगो के दिमाग में सर चढ़कर अपना काम कर रहा था। फ़िल्मी जगत में किशोर दा का अपना एक अलग रुतबा स्थापित हो चुका था। 

अपनी कलाकारी से जीता लोगों का मन

अपने बड़े भाई अशोक कुमार के कहने पर किशोर कुमार साहब ने एक्टिंग शुरू की। एक अभिनेता के तौर पर किशोर कुमार ने सन् 1946 में फ़िल्म 'शिकारी' से अपना करियर शुरू किया। उसके बाद उन्होंने कई फ़िल्मो में काम किया। किशोर साहब बड़ी जल्द ही अपनी कॉमिक टाइमिंग से दर्शकों के मन में एक जगह बना ली। उनकी कुछ चुनिंदा फ़िल्मों में से 'नौकरी(1954)', 'चलती का नाम गाड़ी(1958)', 'हाफ टिकट(1962), 'प्यार किए जा(1966)' और 'पड़ोसन(1968)' जैसी कुछ फिल्में प्रमुख है। वो अपनी एक्टिंग को भी जीते थे और साथ ही काफी मनमौजी भी थे।

कुछ तो लोग कहेंगे

फ़िल्म 'अमर प्रेम(1972)' में किशोर दा द्वारा गाया गाना 'कुछ तो लोग कहेंगे, लोगो का काम है कहना' अभी भी लोगो को जिंदगी जीने की एक राह देता है। न जाने कितने ही गाने किशोर कुमार साहब ने अपनी आवाज़ में गाएँ है। अनुमान के मुताबिक करीब 574 गाने विभिन्न भाषाओं में किशोर साहब ने गाएँ। 'पड़ोसन' फ़िल्म का हर एक गाना लोगो की जुबां पर रटा हुआ है। मिसाल के तौर पर 'एक चतुर नार', 'मेरी प्यारी बिंदु', 'मेरे सामने वाली खिड़की में, एक चाँद का टुकड़ा रहता है' प्रमुख गीत है। उन्होंने उस समय के बड़े-बड़े कलाकारों 'देवानंद', 'अमिताभ बच्चन', 'राजेश खन्ना' के लिए गीत गाया। उनके कुछ प्रमुख गानों में 'मेरे सपनों की रानी', 'ओ साथी रे', 'कुछ तो लोग कहेंगे', 'मेरे महबूब क़यामत होगी', 'पल-पल दिल के पास', 'एक लडक़ी भीगी-भागी सी', 'हमे तुमसे प्यार कितना', 'गाता रहे मेरा दिल', 'ये शाम मस्तानी', 'रूप तेरा मस्ताना', 'ओ हंसिनी', 'जय-जय शिवशंकर', 'तेरे बिना जिंदगी से कोई शिकवा नही आदि कुछ बेमिसाल गीत है जिन्हें अब भी उतना ही प्यार मिलता है जितना उस समय मिलता था। वर्तमान में उनके गानों को रिमेक कर गया जा रहा है। जो उनकी भूमिका की भी पुष्टि करता है।

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