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उत्तर अटलांटिक संधि संगठन (नाटो)

नाटो
नाटो चिन्ह

जब आपको हर कोई हथियाना चाहता हो और आप उसके मुकाबले बेहद ही कमज़ोर हो तो आप क्या करेंगे? आप या तो ये कर सकते है कि आप उसकी बात मान कर उनके साथ हो जाएं या तो अपने जैसे कई लोगो को अपने साथ कर उस शक्ति अथवा व्यक्ति का सामना करे क्योकि उस वक्त आपकी शक्ति दोगुनी होगी। यह बात मैंने आपको इसीलिए बताई है क्योकि कई बार ऐसी स्थिति उत्पन्न हो जाती है। कुछ ऐसी ही स्थिति द्वितीय विश्वयुद्ध के समाप्त होने के बाद विकासशील व छोटे देश की थी। सन् 1945 में द्वितीय विश्वयुद्ध समाप्त हो चुका था और अब दो महाशक्ति(सयुंक्त राज्य अमरिका और सोवियत संघ) अपना क्षेत्र विस्तार व अपनी शक्ति को बढ़ाने की प्रतिस्पर्धा में आमने-सामने थे। जिसे शीतयुद्ध की संज्ञा भी दी जाती है।

नाटो क्या है?

शीतयुद्ध के दौरान यूरोप के देशों ने अपने आपको बचाने के लिए एक सैन्य संगठन की स्थापना की जिसे उत्तर अटलांटिक संधि संगठन(नाटो) कहा गया। 4 अप्रैल, 1949 को 12 संस्थापक देशों ने मिलकर अमरीका के वाशिंगटन में इसकी स्थापना की। इस संगठन का मुख्य उद्देश्य विरोधी राष्ट्रों से अपनी सुरक्षा करना था। नाटो का मुख्यालय बेल्जियम की राजधानी 'ब्रुसेल्स' में स्थापित है। वर्तमान में इस संगठन की सदस्य संख्या 30 है। महासचिव संगठन का सबसे सर्वोच्च, अंतर्राष्ट्रीय अधिकारी होता है। वह संगठन के भीतर परामर्श और निर्णय लेने की प्रक्रिया को संचालित करता है। वर्तमान में नाटो के महासचिव 'जेन्स स्टॉल्टेनबर्ग(नॉर्वे)' है। नाटो के सदस्य देशों का कुल सैन्य खर्च विश्व के सैन्य खर्च का 70% से अधिक है। इसमें अमेरिका अकेले अन्य यूरोपीय देशों की तुलना में अधिक खर्च करता है।


नाटो का उद्देश्य

1. इसकी स्थापना के समय इस संगठन का प्रमुख उद्देश्य पश्चिम यूरोप में सोवियत संघ की साम्यवादी विचारधारा को रोकना था।
2. राजनीतिक और सैन्य तरीकों से अपने सदस्य राष्ट्रों की स्वतंत्रता और सुरक्षा की गारंटी प्रदान करना।
3. सदस्य देशों के बीच एकजुटता और सामंजस्य का भाव पैदा करना।
4. यूरोप में व्यक्तिगत स्वतंत्रता, लोकतंत्र, मानव अधिकारों एवं कानून के शासन के समान मूल्यों के आधार पर स्थायी शांति सुनिश्चित करना।
5. अपने सदस्य देशों के क्षेत्र की रक्षा करना और जब संभव हो तो संकट को कम करने के लिये भी प्रयास करना ।
6. किसी भी सदस्य देश को राष्ट्रीय सुरक्षा के मामले में निर्धारित प्राथमिक उद्देश्यों को प्राप्त करने के लिये अपनी पूरी क्षमता का उपयोग करने के लिए विवश ना करना।
7. अंतर्राष्ट्रीय समस्याओं के निपटान के लिए सामूहिक रक्षा प्रदान करना।
8. समुंद्री खतरों से सुरक्षा।
9. आतंकवाद की निंदा करना।


नाटो में शामिल देश


1. बेल्जियम(1949),
2.कनाडा(1949),
3. डेनमार्क(1949), 
4. फ्रांस(1949), 
5. आइसलैंड(1949),
6.  इटली(1949), 
7. लक्ज़मबर्ग(1949), 
8. नीदरलैंड(1949), 
9. नॉर्वे(1949), 
10. पुर्तगाल(1949), 
11. यूनाइटेड किंगडम(1949),
12. संयुक्त राज्य अमेरिका(1949),
13.  ग्रीस(1952),
14. तुर्की(1952), 
15. जर्मनी (1955), 
16. स्पेन(1982), 
17. चेक गणराज्य(1999), 
18. हंगरी(1999),
19. पोलैंड(1999),
20. बुल्गारिया(2004), 
21. एस्टोनिया(2004), 
22. लातविया(2004), 
23. लिथुआनिया(2004), 
24. रोमानिया(2004), 
25. स्लोवाकिया(2004),
26. स्लोवेनिया(2004), 
27. अल्बानिया(2009)
28. क्रोएशिया(2009) 
29. मॉन्टेनेग्रो(2017) 
30. मैसिडोनिया(2019)


नाटो की भूमिका

नाटो ने समय-समय पर अपनी भागीदारी को सुनिश्चित किया है। शुरुआत में यह एक राजनीतिक संगठन था पर समय के साथ इसने एक सैन्य संगठन के रूप में कार्य करना आरंभ कर दिया। शीतयुद्ध के दौरान बातचीत के माध्यम से कई देशों के बीच इसने विवादों का निपटारा किया और सोवियत समर्थित 'वारसा पैक्ट' का भी विरोध करता रहा। नाटो ने जून 1999 से कोसोवो में शांति और स्थिरता को मजबूत करने के उद्देश्य से 'शांति सहायता अभियान' का नेतृत्व किया। कोसोवो में एक KFOR (कोसोवो फोर्स) का भी गठन किया गया है, जिसका उद्देश्य सुरक्षित वातावरण स्थापित करना, सार्वजनिक व्यवस्था और सुरक्षा बनाए रखना है। 2008 के बाद नाटो ने संयुक्त राष्ट्र के कहने पर अफ्रीका के हॉर्न और हिंद महासागर में अदन की खाड़ी में समुद्री डकैती से निपटने के अंतर्राष्ट्रीय प्रयासों का समर्थन किया। नाटो 'ऑपरेशन ओशन शील्ड' का नेतृत्व कर रहा था जो न केवल जहाज़ो को बचाने का कार्य करता है बल्कि क्षेत्र में सुरक्षा के सामान्य स्तर को बेहतर बनाने के साथ-साथ समुंद्री डकैती को रोकने और विफल करने में भी मदद करता है। इसके अलावा नाटो और भी बहुत से कार्य कर रहा है। पर हाल के कुछ सालों में अमरीका नाटो के सदस्य के खर्च को लेकर सवाल करता रहता है। जिसके चलते नाटो विवादों में घिरा रहता है।

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