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क्वांटम कंप्यूटिंग क्या है?

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क्वांटम कंप्यूटर

क्वांटम कंप्यूटर क्या है? इसे भविष्य का कंप्यूटर क्यों कहा जा रहा है? यह आज के हमारे कंप्यूटर से किस तरह से अलग होगा? क्वांटम कंप्यूटर आने वाले भविष्य को कैसे बदलेगा? क्वांटम एंटेंगलमेंट क्या है? आइए जानते हैं-


कंप्यूटर कैसे काम करता है?

हमारे और कंप्यूटर के बीच में बाइनरी भाषा विकसित हुई है। यह भाषा हमारी और आपकी भाषा से पूरी तरह अलग है। बाइनरी भाषा दो डिजिट 0 और 1 से मिलकर बनी है।इसी 0 और 1 के जरिये हम कंप्यूटर को सूचना भेजते हैं। कंप्यूटर उसे प्रोसेस करता है। उसके बाद रिजल्ट हमारी कंप्यूटर स्क्रीन के सामने आता है।  इसे इस तरह से समझें एक तलाब के किनारे A ( ह्यूमन) खड़ा है और दूसरे किनारे पर B ( कंप्यूटर )। दोनों के बीच एक समझ बन चुकी है कि अगर A एक बार लाइट जलाता है और बंद करता है। उसका मतलब कंप्यूटर अल्फाबेटिकल लैंग्वेज में A समझेगा। A दो बार जलाता और बंद करता है तो कंप्यूटर उसे B समझेगा। इसी बाइनरी डिजिट के आधार पर हमारे और कंप्यूटर के बीच संचार होता है। 

ये बाइनरी डिजिट 0 और 1 होते हैं, जिसमे 0 ऑफ स्टेट और 1 ऑन स्टेट को शो करता है। ये ट्रांजिस्टर की मदद से होता है। ट्रांजिस्टर अगर ऑफ है तो 0 और अगर ऑन है तो 1। इसी के जरिये सभी प्रोग्राम और डेटा का आदान प्रदान हमारे और कंप्यूटर के बीच होता है। 8 बार जब हम इन स्टैट्स को एक समूह में लाते है तो 1 बिट्स का निर्माण होता है। इन्हीं आधारों पर हमारा आज का क्लासिकल कंप्यूटर कार्य करता है।


क्वांटम कंप्यूटिंग क्या है?

क्वांटम कंप्यूटिंग क्लासिकल कंप्यूटिंग से बिल्कुल अलग है। ये क्वांटम बिट्स पर काम करता है। आज के क्लासिकल कंप्यूटर 0 और 1 के सहारे डेटा प्रोसेस करते हैं। ये क्लासिकल कंप्यूटर्स एक समय में या तो 0 को रिप्रेजेंट करेंगे या 1 को। वहीं भविष्य में आने वाला क्वांटम कंप्यूटर एक ही समय में दोनों स्टेट 0 और 1 शो करेगा। 

क्वांटम कंप्यूटर्स में ऑन और ऑफ मात्र से काम नहीं चलता। ये एक ही समय में दोनों पॉसिबल स्टेट में होता है। अर्थात एक ही समय में 0 ऑफ़ और 1 ऑन स्टेट में। क़ुबिट्स की कार्य करने की प्रक्रिया क्वांटम फिजिक्स में क्वांटम इंटेंगलमेंट पर आधारित है। 


क्वांटम एंटेंगलमेंट

क्वांटम यानी सूक्ष्म दुनिया में कण का व्यवहार बिल्कुल अलग होता है। यहां अगर दो कण एक दूसरे से एंटेंगल्ड हैं, तो चाहे उन्हें कितनी दूर भी ले जाया जाए वे जुड़े रहेंगे। दोनों के बीच हुए इस जुड़ाव (एंटेंगलमेंट) के चलते एक कण में हुआ परिवर्तन दूसरे कण को प्रभावित करता है। अगर एक कण ऊपर की तरफ स्पिन होगा तो दूसरा कण चाहे कितना भी प्रकाश वर्ष दूर हो। वह उसी समय नीचे की तरफ स्पिन करेगा। इसे ही क्वांटम एंटेंगलमेंट कहा जाता है। 

वैज्ञानिको को कहना है कि भविष्य में हम क्वांटम एंटेंगलमेंट के सहारे एक दूसरे के बीच सूचना आदान प्रदान भी कर सकेंगे। सूचना का यह आदान-प्रदान आज के मुकाबले कहीं ज्यादा सुरक्षित होगा। इसे हैक कर पाना काफी मुश्किल होगा। इसमें डेटा को आज के मुकाबले ज्यादा उन्नत ढंग से क्रिप्ट किया जा सकेगा।  


कहाँ से आई क्वांटम कंप्यूटिंग की अवधारणा?

हमारी क्वांटम दुनिया बहुत अजीब है। रिसर्चर्स ने अपने अध्ययनों में पाया है कि क्वांटम स्टेट में जब पार्टिकल्स को ऑब्ज़र्व किया जाता है तब वह पार्टिकल फॉर्म में कार्य करते हैं। वहीं जब उन्हें ऑब्ज़र्व नही किया जाता तब वे वेव फॉर्म में अपने आप को बदल लेते हैं। पर हक़ीक़त में ये एक ही समय में वेव भी होते हैं और पार्टिकल भी। जैसे ही हम इसका चुनाव करते हैं तो ये वेव फंक्शन में अपने आप को तोड़ लेते हैं। और अंत में हमे एक पॉसिबल पार्टिकल स्टेट में मिलते हैं।


वेज़मेंन इंस्टिट्यूट ऑफ साइंस ने 1997 में इस बात को प्रमाणित करने के लिए परीक्षण किया। उन्होंने बहुत सूक्ष्म स्तर पर एक स्लेट लगाया। स्लेट के बीच में दो लंबे पोर्ट्रेट आकार के छेद किये गए। इस परीक्षण का निरीक्षण करने के लिए एक बहुत ही छोटा इलेक्ट्रोन डिटेक्टर लगाया गया। इसके बाद छोटे छोटे इलेक्ट्रोन्स को उन स्लेट के सामने फायर किया गया। इलेक्ट्रॉनिक डिटेक्टर जब इस परीक्षण को देख रहा था। उस वक़्त इलेक्ट्रोन अपना पार्टिकल फॉर्म शो कर रहें थे। वहीं जब वैज्ञानिक उस इलेक्ट्रॉनिक डिटेक्टर को हटा देते और परीक्षण करते वक़्त कमरे में कोई नहीं होता। उस दौरान इलेक्ट्रोन्स वेव नेचर में इंटरफियारेंस पैटर्न को स्क्रीन पर दिखाता क्वांटम कंप्यूटिंग की अवधारणा यहीं से निकल कर सामने आयी।

इस घटना ने पूरे भौतिकी जगत को हिला कर रख दिया। ऐसा क्यों होता है? अब तक इसका कोई ठोस उत्तर नहीं मिला है। क्वांटम कंप्यूटर, क्वांटम फिजिक्स के इसी बिहेवियर को सिमुलेट करता है।


क्वांटम कंप्यूटिंग की उपयोगिता

जब हम एक सिक्का हवा में उछालते हैं। उस वक़्त दो संभावनाएं बनती हैं, या तो हेड आएगा या फिर टेल। क्लासिकल कंप्यूटर भी इसी पर वर्क करता है। एक समय में 0 होगा या फिर 1। वहीं क्वांटम कंप्यूटर इससे कई कदम आगे है। वह मिनटों में सिक्कों के सभी पॉसिबल स्टेट को बता देगा कि सिक्के की क्या क्या संभावनाएं होंगी?

अभी क्वांटम कंप्यूटिंग के साथ मुश्किल ये है कि हम जैसे ही इसे ऑब्जर्व करते है तो इसका स्टेट चेंज हो जाता है। पर वैज्ञानिकों का मानना है कि आने वाले दशक तक वह इसका हल निकाल लेंगे। क्वांटम कंप्यूटिंग क्योकि कुबिट्स पर काम करते हैं। तो ये एक ही समय में एक प्रश्न के सभी पॉसिबल उत्तर हमें बता सकते हैं। ये एक सवाल के करोड़ो पॉसिबिलिटीज और पैटर्न को मिनटों में खंगालते हैं। और उसके सभी संभावित उत्तर हमारे सामने लाकर रखते हैं। क्वांटम कंप्यूटिंग में डेटा की क्रिप्टोग्राफ़ी काफी ज्यादा सटीक ढंग से होती है। इसलिए इसे हैक कर पाना लगभग नामुमकिन है। इसकी मदद से हम बड़ी से बड़ी स्पेस से जुड़े समीकरणों को मिनटो में हल किया जा सकता है। जिसे शायद आज का सुपर कंप्यूटर भी हल करने हजारों साल लगा दे।


क्वांटम कंप्यूटर का भविष्य

क्वांटम कंप्यूटर आज के किसी सुपर कंप्यूटर के मुकाबले कई हजार गुना तेज कैलकुलेशन करने में सक्षम होगा। यह भविष्य का कंप्यूटर है। यह आने वाले समय में सभ्यता को नया आकार देगा। आइए जानते हैं कि क्वांटम कंप्यूटिंग भविष्य को कैसे बदलेगी? - 


1 इसके सहारे बड़ी बड़ी फार्मा कंपनियां नए ड्रग्स की खोज तेजी से कर सकेंगी। 

2 नए मॉलिक्यूलर स्ट्रक्चर को जानने में मदद मिलेगी। इसके चलते नए प्रकार के मटेरियल को बनाया जा सकेगा।

3 ब्रह्मांड से जुड़ी खोज करने में आसानी मिलेगी। आज जहां अंतरिक्ष से जुड़े पहलुओ की संगड़ना करने में कई साल लग जाते हैं। वहीं क्वांटम कंप्यूटर इन संगड़नाओं को चुटकियों में हल कर देगा।

4 यह आर्टिफीसियल इंटेलीजेंस व डीप लर्निंग की उन्नति में सहायक साबित होगा। क्वांटम कंप्यूटिंग प्रोसेस से ए.आई तेज गति से सूचनाओं को प्रोसेस कर सकेंगे। विशेषज्ञों का कहना है कि क्वांटम कंप्यूटिंग के आने से ए.आई खुद में सुधार, अपनी कार्यप्रणाली का आकलन, दूसरों से बात चीत एक मनुष्य के स्तर पर कर सकेगा।

5 मौसम का आकलन आज के मुकाबले ज्यादा सटीक ढंग से होगा। कृषि क्षेत्र में अमूल चूल बदलाव आएंगे। क्वांटम कंप्यूटर की सहायता से मिट्टी की जांच कर यह पता लगाया जा सकेगा कि कौन सी फसल उपयुक्त साबित होगी।

6 ट्रैफिक प्रॉब्लम, एयर लाइन कंट्रोल, रेलवे नेटवर्क की कंट्रोलिंग आज के मुकाबले ज्यादा सटीक ढंग से की जा सकेगी। ए.आई से ऑपरेट होने वाली गाड़ियों में सुधार आएगा।

7 क्वांटम कंप्यूटिंग के आने से रोजगार के अवसर कम होंगे। मसीनो का प्रभाव ज्यादा बढ़ेगा। टिकटिंग, ड्राइविंग, ऑडिट, ऑपरेटिंग का काम आर्टिफीसियल इंटेलीजेंस करेगा।

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