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तुर्की (Turkey)

भौगोलिक परिदृश्य

तुर्की
तुर्की झंडा

तुर्की यूरोप और एशिया के बीच सेतु है। उत्तर में इस देश की सीमा ब्लैक सी के साथ। पूर्व में जॉर्जिया, आर्मेनिया, ईरान और इराक़। वहीं दक्षिण पूर्व में सीरिया। पश्चिम में इसके एजियन और मेडिटेरेरियन सी है और उत्तर पश्चिम में इसकी सीमा बुल्गारिया को छूती है। तुर्की की राजधानी अंकारा है। इसका क्षेत्रफल लगभग 7,80,580 किलोमीटर वर्ग में फैला हुआ है। क्षेत्रफल के आधार पर इस देश का स्थान 36वां है। किजिलिरमक यानी लाल नदी तुर्की की सबसे लंबी नदी है। यह किजिल्दग पहाड़ियों से निकलती है और ब्लैक सी में जाकर मिल जाती है। इस्तांबुल तुर्की का सबसे बड़ा और लोकप्रिय शहर है। देश की लगभग सात हजार किलोमीटर की सीमा समुद्र से लगती है। तुर्की के यूरोपिय हिस्से को थ्रैस कहा जाता है। देश की आबादी का 10 फीसदी हिस्सा यहां रहता है। यहां पर भूगौलिक विविधता ज्यादा है। इस कारण मौसम हर जगह एक समान नहीं रहता। देश की सबसे ऊची पर्वत श्रेणी माउंट अरारट है। इस्तांबुल, अंकारा, अंताल्या, इज़्मिर और बुर्सा तुर्की के प्रमुख शहर हैं।


राजनीतिक स्वभाव

तुर्की दुनिया का एकमात्र मुस्लिम मेजोरिटी देश है, जहां पर धर्मनिरपेक्षता है। देश में धर्मनिरपेक्षता की बुनियाद इटली के पहले शाशक कमाल अतातुर्क खान ने रखी। उन्होंने देश में धर्मनिरपेक्षता और स्वस्थ लोकतंत्र का व्यापक तौर पर विस्तार किया। उस समय देश में धर्म का स्कूलों और न्याय व्यवस्था पर कब्जा था। कमाल अतातुर्क खान ने इन सभी का खात्मा किया। कमाल अतातुर्क खान को आधुनिक तुर्की का निर्माता कहा जाता है। 

तुर्की में पार्लियामेंट्री सिस्टम काम करता है। यहां यूनिट्री स्टेट अर्थात केंद्र सरकार ही पूरे देश को चलाती है। उसी के पास सारी शक्तियां होती हैं। कार्यकारी शक्तियां कॉउंसिल मिनिस्टर के पास होती हैं। कॉउंसिल मिनिस्टर का चुनाव राष्ट्रपति करता है और ये राष्ट्रपति के प्रति जवाबदेश होते हैं। वर्तमान में रेसेप तैयप एर्दोगन तुर्की के राष्ट्रपति हैं। एर्दोगन 2003 में पहली बार देश के प्रधानमंत्री बने। उस वक़्त तुर्की में प्रधानमंत्री के पास ज्यादा शक्तियां होती थी बजाए राष्ट्रपति के। एर्दोगन ने इस दौरान देश में अच्छी आर्थिक नीतियां लेकर आए, जिसके चलते देश की अर्थव्यवस्था ने काफी तरक्की की। 

तुर्की में दस वर्ष से ज्यादा कोई प्रधानमंत्री नहीं रह सकता। ऐसे में एर्दोगन ने 2014 में देश का राष्ट्रपति बनने का निर्णय लिया। इसके बाद सत्ता की लालच में संविधान में कई मूल संशोधनों को अंजाम देकर कई विधायी शक्तियां जो पहले प्रधानमंत्री के पास होती थी। उसे राष्ट्रपति को दे दी। इसको लेकर तुर्की में कई जगह विरोध और हिंसक झड़पें भी हुई। हाल के दिनों में राष्ट्रपति एर्दोगन पर यह आरोप लग रहा है कि वह देश की धर्मनिरपेक्षता को खत्म कर रहें हैं। बीते कुछ सालों में एर्दोगन ने देश में काफी बड़े बदलावों को अंजाम दिया है। इसके चलते देश की धर्मनिरपेक्षता पर कई बड़े सवाल किये जा रहें हैं।


सांस्कृतिक परिदृश्य

तुर्की को एशिया और यूरोप का सेतु कहा जाता है। इस देश की संस्कृति में पूरब और पश्चिम दोनों ही धरातलों का मिश्रण देखने को मिलता है। देश की अधिकांश आबादी मुस्लिम है। तुर्की में यहूदी, ईसाई और इस्लामिक शिल्पकृतियों के विश्वविख्यात धरोहरें हैं। लोकप्रिय हया सोफ़िया उनमें से एक है। इसे बाइजेंटाइन सम्राज्य ने बनाया था। बाद में ओटोमन सम्राज्य ने बाइजेंटाइन साम्रज्य को विजयी कर इस हया सोफिया चर्च को मस्जिद में बदल दिया। इस कारण इस धरोहर पर पूर्व (इस्लामिक) और पश्चिम (ईसाईयत) दोनों संस्कृतियों का मिश्रण देखने को मिलता है।

मशहूर सेंटा क्लाज की उत्पत्ति यहीं पर हुई थी। खान-पान से लेकर कई लोकप्रिय गीत संगीत तुर्की ने विश्व को दिए हैं। इसमें कुजू-कुजू, यांकी आदि प्रमुख हैं।


आर्थिक परिदृश्य

तुर्की के पास उभरती हुई अर्थव्यवस्था है। इस देश की जीडीपी दुनिया में 19वें स्थान पर आती है। तुर्की दुनिया में कृषि, मोटर व्हीकल, टेक्सटाइल, कंस्ट्रक्शन मटेरियल, इलेक्ट्रॉनिक एप्लायंस आदि का विशालतम उत्पादनकर्ता देश है। इस देश के पास करीबन साढ़े तीन करोड़ की मात्रा में लेबर फ़ोर्स है। बेरोजगारी दर पिछले कुछ समय से बढ़ी है। 2020 में यह दर 17.2 फीसद पर पहुंच गई। तुर्की दुनिया भर में 180 बिलियन डॉलर के प्रोडक्ट का निर्यात करता है। वहीं दूसरी ओर यह देश 234 बिलियन डॉलर के समानों को अपने देश में आयात करता है। टूरिज्म से इस देश की इकॉनमी को काफी लाभ पहुंचता है। इस समय भले ही तुर्की की अर्थव्यवस्था लड़खड़ाई हुई है परंतु विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में इस देश की अर्थव्यवस्था काफी तेजी से आगे बढ़ेगी।

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