Ticker

6/recent/ticker-posts

कौन है उइगर मुस्लिम? और क्या है इनकी समस्याएं?

कौन-है-उइगर-मुस्लिम-और-क्या-है-इनकी-समस्याएं
उइगर मुस्लिम

उइगर पूर्वी और मध्य एशिया में रहने वाले तुर्की जनजाति के लोग है। ये तुर्की परिवार की बोली और संस्कृति से नाता रखते हैं। इनकी ज्यादातर आबादी चीनी गणराज्य द्वारा नियंत्रित शिनजियांग प्रांत में रहती है। इस क्षेत्र की सीमाएं 8 देश भारत, मंगोलिया, रूस, ताजिकिस्तान, अफगानिस्तान, कजाकिस्तान, किरगिजस्तान, और पाकिस्तान के साथ लगती है। भारत का अक्साई चीन क्षेत्र, इसी इलाके में शामिल हैं। इस पर चीन ने लंबे समय से कब्जा कर रखा है। शिंजियांग की राजधानी उरुमची है और इसका सबसे बड़ा शहर काश्गर है। यहां की अधिकतर उइगर आबादी इस्लाम को मानने वाली है। जो कई मामलों में चीन के बहुसंख्यक हान समुदाय से अलग है। 



शिनजियांग का इतिहास 

यह क्षेत्र पहले आजाद था। बाद में क्विंग डेनेस्टी ने 18वीं शताब्दी में इस पर कब्जा कर लिया। 1940 तक यह इलाका उसके कब्जे में ही रहा। इसके बाद शिनजियांग क्षेत्र थोड़ा आजाद हुआ। तब तक चीन में कम्युनिस्टों ने अपनी जड़ें जमा ली थी और 1949 तक आते-आते चीन पर कब्जा कर लिया। चीन में समाजवादी विचारधारा का प्रभाव था। उस वक़्त सोवियत संघ इस विचारधारा को विभिन्न स्तरों पर दूसरे देशों में फैला रही था। इसीलिए विचारधारात्मक गठबंधन के चलते सोवियत संघ की मदद चीन को मिली। और उसने पूरे शिनजियांग क्षेत्र को हथिया लिया।

चीन द्वारा इस क्षेत्र को हथियाने का मुख्य कारण इस क्षेत्र की प्राकृतिक संपदा थी। यहां तेल , कोयला और गैस के भंडार मौजूद हैं जो चीन के आर्थिक विकास में मददगार साबित हुए। शिनजियांग चीन के लिए सेंट्रल एशिया का मुख्य द्वार है। इस कारण व्यापार और आर्थिक दृष्टि से यह क्षेत्र काफी मददगार है। यह क्षेत्र कागज़ी रूप से स्वायत्त है लेकिन यहां हर विषय में चीन की केंद्रीय सरकार का दबदबा कायम रहता है। बस कहने को यह प्रान्त स्वशासी रह गया है।


उइगर और अलगाववाद 

चीन ने जब से शिनजियांग को अपने कब्जे में लिया है तब से लेकर आज तक हिंसक गतिविधियां होती आई हैं। चीन अलगाववाद को उइगर मुस्लिम समुदाय और संस्कृति का हिस्सा मानता है। उइगर समुदाय का चीनी सरकार के खिलाफ बगावत का लंबा इतिहास है। अब दोनों के बीच एक लंबी खाई बन चुकी है जिसे पाटना काफी मुश्किल है। प्रांत में हमेशा हिंसक प्रदर्शन होते रहते हैं। 2013 में एक उइगर कार चालक ने सड़क पर चलते राहगीरों को कुचल दिया था इसमें दो हान समुदाय के लोग और 3 उइगर मारे गए। साल 2014 में चाकुओं से लैस उइगर उग्रवादियों ने कुनमिंग नामक रेलवे स्टेशन पर हिंसक हमला किया। इसमें 31 लोगों की जाने गई। चीन सरकार उइगर पर लगातार संदेह की दृष्टि से नजर रखती है। 


उइगर समुदाय पर पाबंदियां

पिछले कुछ सालों में चीनी सरकार ने इस समुदाय पर सख्त पाबंदियां लगा दी है जिनमें से कुछ इस तरह हैं - 

1. इस समुदाय को इस्लाम धर्म का पालन करने पर रोक लगी है। 

2. मस्जिद जाने तथा नमाज पढ़ने और रमज़ान में रोज़े रखने की भी मनाही है। 

3. मुस्लिम धर्म से जुड़े रीति-रिवाजों तथा प्रथाओं को मानने पर पाबंदी।  

4. मुस्लिम समुदाय से जुड़ी पहचान जैसे - लंबी दाढ़ी रखना , टोपी पहनना , बच्चों को धार्मिक शिक्षा देने पर भी रोक लगी हुई है। 

5. उइगर समुदाय अपने बच्चों के इस्लामिक नाम नहीं रख सकते।

6. इस समुदाय के लोगों के फेस की थर्मल स्क्रीनिंग की जाती है।

7. जगह -जगह कैमरों की निगाहें इन पर नजर रखती है। इनकी हर एक गतिविधि पर चीनी सरकार की नजर बनी रहती है। उइगर समुदाय से जुड़े लोगों के मोबाइल डेटा की पल पल की जानकारी चीनी सरकार के पास पहुंचती है।

8.  लोगों का बायोमेट्रिक डाटा इकट्ठा किया जाता है।

9. जिन चौकियों पर हान समुदाय के लोग ऐसे ही निकल जाते हैं वहां उइगर को अपनी जांच करवानी पड़ती है। 

10. इन्हें देश में कहीं भी आने-जाने की मनाही है। इसके साथ ही उइगर नागरिकों को अपना पासपोर्ट भी सुरक्षा कारणों की वजह से सरकार के पास जमा कराना होता है। 


चीन के री-एजुकेशन सेंटर 

कज़ाक और अन्य अल्पसंख्यकों को चीनी सरकार बड़े - बड़े कैम्पों में रखती है। यहां उन्हें अपनी मूल भाषा व संस्कृति से अलगाव और चीनी संस्कृति व सरकार से प्रेम करना सिखाया जाता है। इनमें बच्चों और बड़ों के रहने के लिए अलग-अलग जगह निर्धारित की गई है। कई बार छोटे - छोटे अपराधों में संलग्न होने का इल्ज़ाम इन अल्पसंख्यकों पर लगाया जाता है। इसके बाद उन्हें दोबारा शिक्षित करने के नाम पर चीनी सरकार अपना एजेंडा उनके भीतर डालने का कार्य करती है। 

सरकार उइगर की युवा पीढ़ी को पूरी तरह अपने काबू में करना चाहती है। इन सेंटरों में केवल चीनी भाषा ही बोली जाती है। 12 जुलाई 2015 को एक सेटेलाइट जब पश्चिमी चीनी क्षेत्र से गुजरा तो यहां सूनसान और बड़े रेगिस्तान की तस्वीरें दिखाई दी। वहीं तीन साल बाद 23 अप्रैल 2018 को एक और सेटेलाइट ने जब दोबारा इसी इलाके की तस्वीर ली , तो यह क्षेत्र पूरी तरह से बदल गया था। यहां एक विशाल अहाता बना हुआ दिखाई दिया। जिसके आस - पास लगभग दो किलोमीटर लंबी दीवारें बनीं हुई थी, साथ ही इनकी सुरक्षा के लिए सुरक्षाकर्मी भी तैनात थे। इन सभी सुरक्षा इंतजामों के बाद भी यहां 16 निगरानी टावर बने हुए हैं, जो हर पल अपनी पैनी निगाहों से पहरा देते हैं। इन तस्वीरों के बाहर आने से यह इल्जाम पुख्ता हो गया है कि चीन उइगर मुस्लिमों को इन सेंटरों में रखकर प्रताड़ित करता है। इन लोगों को अपने परिवार व परिजनों से बातचीत करने की मनाही है। यदि पूरे चीन की बात करें तो किंडर गार्टन स्कूलों की संख्या में महज 8 फीसदी का इजाफा हुआ है तो वहीं अकेले शिनजियांग क्षेत्र में ऐसे स्कूलों में 82 फीसदी की बढ़ोतरी देखी गई है। इससे यह स्पष्ट हो चुका है कि चीन इन स्कूलों के सहारे एक पूरी संस्कृति को धीरे-धीरे नष्ट कर रहा है। 


चीन का श्वेत - पत्र

शिनजियांग प्रांत को लेकर चीनी सरकार के अपने दावे और कायदे - कानून है। उसका कहना है कि वह इन एजुकेशन सेंटर में लोगों की शिक्षा पर ध्यान देता है।

शिनजियांग प्रांत पर एक श्वेत पत्र में सरकार का दावा है कि वह यहां अलगाववाद, धार्मिक अतिवादी लोगों को रखता है। जो चीन की अखंडता को तोड़ने की कोशिश करतें हैं। 1990 से 2016 के बीच यहां कई हिंसक झड़पें हुईं। इसीलिए यहां कानून के अनुसार शिक्षा और ट्रेनिंग शुरू की गई। इसके चलते अब आतंकी गतिविधियों में कमी देखने को मिली है। यहां अपराधों के मुताबिक कार्रवाई की जाती है। संगीन आरोपो में कड़ी सजा का प्रावधान किया गया है, लेकिन जिन लोगों को जबरदस्ती या बहला फुसलाकर इन गतिविधियों में शामिल किया जाता है। उन्हें इन ट्रेनिंग सेंटरों में लाकर आगे की जिंदगी के लिए तैयार किया जाता है। यहां मैंडरिन भाषा के साथ- साथ कानून और अन्य प्रकार की स्किल्स सिखाई जाती है। यहां पिछले 3 साल से कोई आंतकी हमला नहीं हुआ है जो शांति की दास्तां बयां करता हो। 


उइगर समुदाय को लेकर अमेरिका ने चीन पर लगाया प्रतिबंध

चीन यह बात बेशक कहता आया है कि वह अपने यहां अल्पसंख्यकों को किसी भी प्रकार से प्रताड़ित नहीं करता है किंतु आंकड़े कुछ और ही बताते हैं। 1949 में उइगर नागरिकों की शिनजियांग क्षेत्र में जनसंख्या लगभग 3.2 मिलियन थी। उस वक्त यहां हान बहुसंख्यकों की जनसंख्या कम थी। वर्तमान में यहां 47 फीसदी उइगर और 40 फीसदी हान समुदाय के लोग रहते हैं। यहां नौकरियों, सेवाओं आदि में हान समुदाय को प्राथमिकता दी जाती है। इन सभी बातों को देखते हुए अमेरिका में चीन पर प्रतिबंध लगाने वाला बिल पास हो गया है। इसपर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हस्ताक्षर भी कर दिए हैं। अमेरिका में स्थित यूनाइटेड स्टेट कमीशन आॅन इंटरनेशनल रिलीजन फ्रीडम ( USCIRF) वह संस्था है जो दुनियाभर के अल्पसंख्यकों की स्थितियों पर नजर रखती है। इसके द्वारा चीन पर प्रतिबंध लगाने का सुझाव अमेरिका को दिया गया है। जिसपर अमल करते हुए यह बिल अमेरिका की पार्लियामेंट में पास हो गया है।  

टिप्पणी पोस्ट करें

0 टिप्पणियां