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चीन

चीन
चीन झंडा
कंट्री सीरीज की इस कड़ी में आज हम जानेंगे चीन देश के बारे में। चीन विश्व का चौथा सबसे बड़ा देश है। और अर्थव्यवस्था के स्तर पर दूसरा। इस लिहाज से इसका व्यापक प्रभाव विश्व के बाकी देशों पर पड़ता है। ऐतिहासिक दृष्टि से देखें तो दुनिया की प्राचीनतम सभ्यताओं में चीन की सभ्यता का नाम शुमार है। यहां से कन्फ्यूशियस, लाओत्से जैसे महान सन्त हुए। इन सन्तों पर भगवान बुद्ध का बड़ा प्रभाव था। और इतिहास में चीन के ऊपर भी बुद्ध का व्यापक प्रभाव पड़ा। यही एक बड़ा कारण है, जिसके चलते आज चीन की 90 प्रतिशत से भी ज्यादा आबादी बौद्ध है। 

चीन का राजनीतिक स्वरूप क्या है? चीन का भौगोलिक ढांचा कैसा है? चीन का सांस्कृतिक और राजनीतिक स्वरूप कैसा है? आइए जानते हैं-

चीन का भौगोलिक स्वरूप

चीन एक विशाल देश है। इसका कुल क्षेत्रफल 9.597 मिलियन किलोमीटर स्क्वायर है। क्षेत्रफल के आधार पर चीन दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा देश है। इसका ज्यादातर क्षेत्र पहाड़ों से घिरा है। देश के दो तियाही हिस्सों में आपको पहाड़ ही पहाड़ देखने को मिलेंगे। बाकी 10 प्रतिशत टीला  और 12 प्रतिशत मैदान है। चीन की सीमा दक्षिण में दक्षिणी चीन सागर, वियतनाम और लाओस से। दक्षिण पश्चिम में भारत, नेपाल और भूटान के साथ। पश्चिम में अफगानिस्तान, पाकिस्तान और तजाकिस्तान है। उत्तर में कयरञ्जस्तान और मंगोलिया। वहीं पूर्व में इसके रूस और नार्थ कोरिया है।

देश के पूर्वी भाग में 94 प्रतिशत जनसंख्या रहती है। यहां की मिट्टी उपजाऊ है। दक्षिणी भाग में अधिकांश पहाड़ी क्षेत्र  हैं। यहां पर यांग्त्ज़ी नदी बहती है। यह चीन की सबसे लंबी नदी है। यहां की सबसे बड़ी झील चिंगहई झील है। यहां पर गन्ना, गेंहू, धान, तिलहन, मक्का आदि की सबसे ज्यादा खेती होती है। चीन की राजधानी बीजिंग है। यह देश के पूर्वी भाग के स्थित है। 2008 में यहां पर ओलिंपिक गेम्स का आयोजन हुआ था।


चीन की अर्थव्यवस्था

चीन एक मिश्रित अर्थव्यवस्था वाला देश है। इसमें बाजारवादी और समाजवादी अर्थव्यवस्था के दोनों गुणों को समाहित किया गया है। गौरतलब बात है 1978 के पहले चीन की अर्थव्यवस्था काफी कठोर थी। इसमें बाहरी बाजार का प्रवेश करना निषेध था। पर 1978 में डेंग शाओ पिंग के नेतृत्व में चीनी अर्थव्यवस्था में कई बड़े बदलाव हुए। विदेशी निवेश और बाजार के लिए इकॉनमी को खोल दिया गया। आज चीन की अर्थव्यवस्था दुनिया की दूसरी सबसी बड़ी अर्थव्यवस्था है। अनुमान यह लगाया जा रहा है की आने वाले कुछ दशकों में यह अमेरिकी अर्थव्यवस्था को पछाड़ कर दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन जाएगी। 2019 की रिपोर्ट की माने तो चीन की अर्थव्यवस्था की जीडीपी 14.140 ट्रिलियन डॉलर की है।

चीन का 27 फीसदी श्रमिक कृषि, 29 प्रतिशत उद्योग और 44 फीसदी सर्विस सेक्टर में कार्यरत है। यहां 10.6 फीसद युवा बेरोजगार हैं। 2020 की रिपोर्ट के अनुसार ईज ऑफ डूइंग बिजनेस रैंकिंग में चीन का स्थान 31वां है। चीन विश्व भर में 2.4 ट्रिलियन डॉलर के वस्तु और सेवा का निर्यात करता है। अमरीका और यूरोपियन यूनियन चीन द्वारा निर्यात किये जाने वाले वस्तु और सेवा के सबसे बड़े खरीददार हैं। चीन अपने कुल निर्यात का महज 3.08 प्रतिशत वस्तु और सेवा का निर्यात भारत में करता है। वहीं दूसरी ओर विश्व भर से वह 2.9 ट्रिलियन डॉलर्स के समानों का आयात करता है। यूरोपियन यूनियन और आसियान देश चीन के लिए सबसे बड़े आयात के श्रोत हैं। यह दुनिया का सबसे बड़ा निर्यातक और दूसरा सबसे बड़ा आयातक देश है।


चीन का सांस्कृतिक स्वरूप 

चीन की संस्कृति विश्व की पुरातन संस्कृतियों में से एक है। चीनी स्कॉलर लिआंग क्विचाओ की माने तो चीन के पास 3600 वर्ष पुराना लिखित इतिहास है। चीन की संस्कृति काफी विविधताओं से भरी है। ऐतिहासिक कालक्रम में भारत के दर्शन का वृहत्तर प्रभाव चीन पर पड़ा। इस कारण चीन में लाओत्से और कन्फ्यूशियस जैसे महापुरुषों हुए। ये दोनों महापुरुष बुद्ध और महावीर के समकालीन थे। दोनों महान सन्तों के दर्शन की बुनियाद भारत की आध्यात्मिक पृष्ठभूमि पर ही पड़ी। इसके अलावा भारत के महान शाशक अशोक की पुत्री संघमित्रा ने चीन में जाकर बुद्ध धर्म का प्रचार किया। इस दौरान आध्यात्मिकता के प्रभाव में आकर चीन में लाखों लोगों ने बुद्ध धर्म को अपनाया। प्राचीन समय में चीन से हज़ारों विद्यार्थी नालंदा विश्वविद्यालय में शिक्षा लेने आते थे। चीन और भारत का एक बहुत बड़ा सांस्कृतिक जुड़ाव रहा है।

चीन में आपको भगवान बुद्ध से जुड़ी कई राष्ट्रीय धरोहरें देखने को मिलेंगी। इसके अलावा लाओत्सो, कन्फ्यूसियस से जुड़े कई संग्रहालय चीन में हैं। 1917 रूसी क्रांति के बाद समाजवाद का वृहत्तर प्रभाव विश्व के कई देशों में पड़ा। चीन भी इससे अछूता नहीं रहा। माओत्से तुंग के नेतृत्व में 1949 में चीन के भीतर एक क्रांति होती है। फलस्वरूप चीन में कम्युनिज्म का आगमन होता है। 

चीन में खान पान की दृष्टि से विभिन्न प्रकार की चीजें खाई जाती हैं। यहां सभी नकदी फसलों के अलावा बिछु, चमगादड़, टिड्डे, ऑक्टोपस से लेकर बड़े बड़े जानवरों का गोश्त बड़े चाव के साथ खाया जाता है। कहते हैं बुद्ध के जीवन की एक बहुत ही अद्भुत घटना है। एक बार उनका एक संन्यासी उनसे पूछता है कि क्या जानवरो को खाना उचित है? जवाब में भगवान बुद्ध कहते हैं मात्रा अपनी जीभ के स्वाद के लिए किसी के जीवन को छीनना किसी भी प्रकार से भी उचित नहीं है। हां अगर पहले से किसी कारण वश वह मर चुका है तो उसके मास को खाया जा सकता है। तब से बौद्ध लोग मृत जानवर के मास का भक्षण करते हैं। इसी वजह से चीन में वृहत्तर स्तर पर मांस को खाया जाता है। चीन की आधिकारिक भाषा मंदारिन है। यह विश्व की दूसरी सबसे ज्यादा बोले जाने वाली भाषा है।

चीन की 91 प्रतिशत आबादी बौद्ध, 3.5 क्रिस्चियन, 1.5 मुस्लिम और 4 प्रतिशत लोग किसी अन्य धर्म से तारलुक रखते हैं।


चीन का राजनीतिक परिदृश्य

चीन एक जनवादी गणराज्य देश है। यहां राष्ट्रपति देश का प्रमुख होता है। चीन का राजनीतिक ढांचा कुछ इस प्रकार है, सबसे पहले चीनी साम्यवादी दल उसके बाद चीन की मुक्ति सेना और अंत में सरकार आती है। वर्तमान में शी जिनपिंग चीन के राष्ट्रपति हैं। वह तीनों ढाँचों के भी प्रमुख हैं।

चीन में स्वतंत्र न्यायपालिका का अभाव है। इस कारण चीन के भीतर पारदर्षिता नहीं है। व्यवहारिक परिपेक्ष में आम जनता सरकार के विरोध में आवाज नहीं उठा सकते। सन 1989 में तियानमेन स्क्वायर पर लोकतंत्र की आवाज उठा रहे छात्रों पर चीनी सरकार ने गोलियां बरसाई थी। इसमें कई छात्रों की जाने गई। इससे यह स्पष्ट होता है कि साम्यवाद की आड़ में चीनी सरकार तानासाही शाशन व्यवस्था देश में चला रही है। चीन में साम्यवादी दल के अलावा आठ राजनीतिक दल और भी हैं, जो सक्रिय रहते हैं। गौरतलब बात है कि इनकी केवल परामर्शदाता की भूमिका रहती है। इन्हें साम्यवादी दल की मुख्यता को स्वीकार करना होता है। 

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