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ब्रह्मांड के पांच बड़े अनसुलझे रहस्य

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अंतरिक्ष सदा से हमारी जिज्ञासाओं का केंद्र रहा है। ग्रह, नक्षत्र और तारों से हमारा रिश्ता काफी पुराना है। इस अनंत असीमित ब्रह्मांड में लाखों रहस्य छिपे हैं। ज्यों ज्यों विज्ञान का दायरा बढ़ा है, त्यों त्यों इस ब्रह्मांड के रहस्य उजागर हुए हैं। पर अब भी अंतरिक्ष से जुड़े कई ऐसे रहस्य हैं, जिनका पता लगाने में विज्ञान अब तक सफल नहीं हुआ है। आज हम ब्रह्मांड के पांच ऐसे अनसुलझे रहस्यों की बात करेंगे, जिसकी अब तक कोई खोज और खबर नहीं है। आइए जानते हैं-

1 ब्रह्मांड की शुरूआत कैसे हुई?
2 डार्क मैटर और डार्क एनर्जी का रहस्य  
3 ब्लैक होल का रहस्य
4 मंगल ग्रह से जुड़े रहस्य
5 यह ब्रह्मांड कितना बड़ा है?

ब्रह्मांड की शुरूआत कैसे हुई?

बिग बैंग ब्रह्मांड की शुरुआत की सबसे प्रचलित वैज्ञानिक धारणाओं में से एक है। बेल्जियम के एक खगोलविद जॉर्ज हेनरी लैमत्रे ने इस सिद्धांत को दिया। इस सिद्धांत के अनुसार लगभग 14.5 अरब वर्ष पहले ब्रह्मांड की सारी उर्जा, भौतिक पदार्थ और अस्तित्व एक बिंदु में कैद था। अचानक एक बहुत बड़ा विस्फोट हुआ। और समय, स्पेस और मैटर अस्तित्व में आए। यहीं से ब्रह्मांड की उत्पत्ति होने की शुरुआत हुई। तब से ब्रह्मांड निरंतर फैलता जा रहा है।   

पर कई बड़े वैज्ञानिकों का मानना है कि बिग-बैंग थ्योरी एक कल्पना है। उनका कहना है कि किसी भी घटना को घटित होने के लिए समय की जरूरत होती है। बिग बैंग से पहले समय नहीं था। बिना समय की उपस्थिति के बिग बैंग घटित कैसे हुआ? अचानक से समय की उपस्थिति बिग बैंग की घटना से कुछ क्षण पहले कैसे हुई? बिग बैंग थ्योरी के पास इन सवालों का कोई ठोस उत्तर नहीं है। महान वैज्ञानिक स्टीफन हॉकिंग का मानना था कि ब्रह्मांड अचानक से स्वतः ही स्फूर्त होकर आया है। बिग बैंग हमारी अब तक के ज्ञात जानकारियों में सबसे सटीक सिद्धांत है। पर ये कितना सच है? इसका कोई प्रमाण हमारे पास अब तक नहीं है। इस सिद्धांत के भीतर कई बड़े अंतरविरोध हैं। इस रूप में ब्रह्मांड का सृजन कैसे हुआ? ये आज भी एक रहस्य का विषय बना है।

डार्क मैटर और डार्क एनर्जी का रहस्य 

अंतरिक्ष का 95 फीसद हिस्सा डार्क मैटर और डार्क एनर्जी से मिल कर बना है। बाकी का पांच प्रतिशत हिस्सा भौतिक पदार्थों से। इनमें ग्रह, नक्षत्र, तारे वे सभी आते हैं, जिन्हें हम देख सकते हैं। वैज्ञानिकों का मत है कि डार्क मैटर और डार्क एनर्जी ही वह कड़ी है, जिसने इस पूरे ब्रह्मांड को एक सिलसिलेवार ढंग से बांध रखा है। डार्क मैटर ऐसे पदार्थो से मिल कर बने हैं जो लाइट को ऑब्ज़र्व, इमिट और रिफ्लेक्ट नहीं करते। इस कारण अब तक के साधनों के बल पर इसे देख पाना संभव नहीं है। वैज्ञानिक परिकल्पना कहती है कि डार्क मैटर और डार्क एनर्जी ही इस ब्रह्मांड का आधार हैं। इसी पदार्थ से पूरे ब्रह्मांड का अस्तित्व बना है। इन पदार्थों की कोई विकसित समझ हमारे पास अब तक नहीं है। इसको समझ पाने का कोई ठोस आधार भी हमे अब तक नहीं मिला है। पर इस बात से कोई इनकार नहीं कर सकता  कि इन पदार्थ का अस्तित्व नहीं होता। 

इन पदार्थों के विषय में हमारे पास अधिक जानकारी नहीं है। केवल परिकल्पनाओं के सहारे ही इसे हम समझने की कोशिश कर रहें है।

ब्लैक होल का रहस्य

अंतरिक्ष कई रहस्यों को अपने भीतर समेटे हुए है। उनमें से एक है ब्लैक होल। ब्लैक होल ब्रह्मांड के सबसे सघन ऑब्जेक्ट में से एक हैं इनका गुरुत्वाकर्षण खिचांव इतना अधिक होता है कि इसमें लाइट भी बच कर नहीं निकल पाती।ब्लैक होल का निर्माण विशालकाय तारों के अंदर होने वाले विस्फोट के कारण होता है। इसकी सर्वप्रथम खोज कार्ल स्कवार्जस्चिल्ड और जॉन व्हीलर ने की थी। विज्ञान के विस्तार ने ब्लैक होल के कई रहस्यों से पर्दा उठाया है। पर आज भी इससे जुड़े कई ऐसे रहस्य हैं, जिनके ऊपर से पर्दा अब तक नहीं उठा है। इनमें से एक है कि ब्लैक होल के भीतर क्या है? इस सवाल का जवाब अब तक किसी को नहीं पता है। 

यहां से लाइट भी बच कर बाहर नहीं निकल पाती। इस कारण इसे देख पाना असंभव है। हमें यह भी नहीं पता कि ब्लैक होल के केंद्र में जब कोई ऑब्जेक्ट जाता है। तो उसके साथ क्या होता है? कई वैज्ञानिकों की परिकल्पना है कि ब्लैक होल में जाने के बाद ऑब्जेक्ट किसी दूसरी आकाशगंगा में चले जाते हैं। एक अनुमान के मुताबिक हमारी मिल्कीवे गैलेक्सी में 100 मिलियन आकाशगंगाएं हो सकतीं हैं।

यह संसार द्वंद पर चलता है। इस संसार में हर एक प्रक्रिया का द्वंद है। जैसे - स्त्री का पुरुष, जीवन का मृत्यु आदि। इसी रूप में वैज्ञानिकों का कहना है कि हमारे इस ब्रह्मांड का भी द्वंद होगा। उस ब्रह्मांड में हर चीज़ उल्टी होती होगी। यहां जिन आधारों पर फिजिक्स के नियम कार्य करते हैं। उस ब्रह्मांड में यही फिजिक्स के नियम उल्टा काम करेंगे। और ब्लैक होल उस द्वंदात्मक ब्रह्मांड में जाने का साधन हो सकता है। इसी कारण से व्हाइट होल की धारणा आई है। 

आपको जानकर हैरानी होगी कि अगर माउंट एवरेस्ट को संकुचित कर 1 नेनोमीटर के साइज का बना दिया जाए या फिर पृथ्वी को संकुचित कर एक मटर के दाने के बराबर कर दिया जाए। तो उससे एक मटर के दाने के बराबर ब्लैक होल बन जाएगा।

मंगल ग्रह से जुड़े रहस्य

एक समय मंगल ग्रह भी पृथ्वी के जैसा था। वहां पर भी बड़े  बड़े समुद्र और जल धाराएं थी। वैज्ञानिकों का मानना है कि करोड़ो साल पहले हुए गुरुत्वाकर्षण हलचल के चलते इसकी मैग्नेटिक फील्ड कमजोर हो गयी। इस कारण सतह से सारा पानी भाप बन कर उड़ गया होगा या फिर सतह के  भीतर ही ठंडा होकर जम गया होगा। कमजोर हुई मैग्नेटिक फील्ड के चलते सूर्य की हानिकारक किरणों का प्रभाव सीधे सतह पर पड़ने लगा। उस वक़्त अगर कोई प्रजाति मंगल ग्रह पर रही होगी तो जल के अभाव और सूर्य की हानिकारक रेडिएशन के प्रभाव के चलते उसी वक़्त खत्म हो गयी होगी। नासा के ओरबिटर्स ने मंगल की सतह से जो जानकारी भेजी है। उससे यह साफ स्पष्ट हो रहा है कि पानी मंगल के दोनों ध्रुवों में जमा है। यानी करोड़ो साल पहले मंगल पर पृथ्वी की तरह ही समुद्र और नदिया थी। इस कड़ी ने एक नई बहस को जन्म दिया है कि हो न हो आज से करोड़ो साल पहले मंगल पर भी पृथ्वी की तरह जीवन था।

कई विज्ञान विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि पृथ्वी पर जीवन के अंश मंगल से ही आये हैं। पर इसमें कितनी हक़ीक़त है और कितना फ़ासना यह अभी कोई नहीं जानता। ये एक रहस्य का विषय है।

आखिर यह ब्रह्मांड कितना बड़ा है?

एक सूर्य और और नौ ग्रहों के मेल से हमारा सौर मंडल बना है। करोड़ो अरबों सौर मंडलों के समूह को आकाशगंगा कहा जाता है। हमारी मंदाकनी आकाशगंगा में एक अनुमान के मुताबिक 200 बिलियन सौर मंडल हो सकते हैं। ये एक अनुमान है। संख्या इससे अधिक भी हो सकती है। अब तक हमारे हमारे ज्ञात ब्रह्मांड में 150 बिलियन्स आकाशगंगाओं का हमें पता चला है। पर ये हमारी सीमा है ब्रह्मांड को जांचने की। ब्रह्मांड इससे भी कई गुना ज्यादा बड़ा है, या ये कहें अंतहीन है। 

ऑक्सफ़ोर्ड यूनिवर्सिटी की एक रिसर्चर टीम ने अपने शोध में पाया कि अब तक के ज्ञात ब्रह्मांड में हमने जितनी आकाशगंगाओं को जाना है। उनकी संख्या 250 गुना और अधिक हो सकती हैं। ये संख्या इतनी बड़ी है कि आप इसे पूरा लिख कर ब्राउज़र पर सर्च करेंगे तो आपका ब्राउज़र क्रैश हो सकता है। ये अनंत विशाल ब्रह्मांड के विषय में अब तक हमने बस इतना ही जाना है। कई बड़े वैज्ञानिकों का कहना है कि यह जानकारी महज एक मटर के दाने के बराबर है। अंतरिक्ष इससे कहीं ज्यादा विशाल है। 

क्या ब्रह्मांड का भी कोई ओर छोर है? या ये एक अंतहीन प्रक्रिया। अब तक के रहस्यों में ये एक बड़ा रहस्य है कि ब्रह्मांड कितना बड़ा है।

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