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वायरस क्या है? ढांचा, प्रकार जानिए सब कुछ

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वायरस
क्या होता है वायरस? वायरस का ढांचा कैसा होता है? वायरस कैसे कार्य करते हैं? शरीर के भीतर प्रवेश लेने के बाद वायरस किस प्रकार से अपने प्रजनन दर को बढ़ातें हैं? वायरस से संक्रमित होने के बाद किस प्रकार के रोग जन्म लेते हैं? कौन कौन से उपाय अपनाकर हम वायरस से लड़ सकते हैं? आइए जानते हैं-


वायरस (विषाणु)

वायरस एक संयोजक कड़ी है, जैव और अजैव पदार्थों के बीच। इसकी सर्वप्रथम खोज आइवनोवस्की ने की थी। इसे सर्वप्रथम एक तम्बाकू के पौध पर खोजा गया था। इसलिए टोबेको मोजैक वायरस को दुनिया का पहला वायरस कहा जाता है। वायरस को जीवित रहने के लिए एक होस्ट की जरूरत होती है। इस कारण जब ये बाहर रहते हैं तब इनकी मृत्यु हो जाती है। और जब ये किसी बाडी होस्ट के भीतर जाते हैं तो इनकी संख्या तेजी से बढ़ने लगती है। आइए जानते हैं कि वायरस के वह कौन कौन से गुण हैं जो इन्हें जीवित श्रेणी मं डालते हैं? और वह कौन से दूसरे गुण हैं जो इन्हें निर्जीव बनाते हैं?


वायरस के जीवित गुण

1 वायरस का अनुवांशिक पदार्थ, डी.एन.ए (डिआक्सी न्यूक्लिक एसिड) या आर.एन.ए (राइबो न्यूक्लिक एसिड) हो सकता है।

2 वायरस के भीतर जनेटिक और पेरासिटिक गुणधर्म होते हैं।

3 वायरस के अंदर बिमारी फैलाने की क्षमता होती है।

ये तीन गुण वायरस को जीवित श्रेणी में डालते हैं।


वायरस के निर्जीव गुण

1 सभी जीवों के भीतर कोशिका और पुरस (प्रोटोप्लाज्म) होते हैं। पर वायरस के भीतर इन दोनों का अभाव है।

2 वायरस किसी भी प्रकार के पाचन क्रिया नहीं कर सकते हैं। इनके भीतर चपापचयी क्रिया और न्यूट्रिशन का अभाव होता है।

3 ये होस्ट के बाहर किसी भी प्रकार का विकास और प्रजनन नहीं कर सकते हैं।

इस कारण वायरस को जीव-निर्जीव के बीच का संयोजी तत्व कहा जाता है। वायरस के भीतर जीव-निर्जीव दोनों  गुण धर्म होते हैं।   


वायरस का ढांचा

वायरस के केन्द्र में जीनोम पाया जाता है। इसके भीतर वायरस का अनुवांशिक पदार्थ होता है। अनुवांशिक पदार्थ में या तो डीएनए होगा या फिर आरएनए। जीनोम के बाहर एक पतली परत होती है, जिसे नुक्लेओकैप्सिड कहते हैं। यह प्रोटीन के बने होते हैं। यह वायरस को ट्रांसमिट करने में मदद करता है। कई वायरस में एक तीसरी परत भी होती है। इस परत को इंवेलप कहते हैं। यह ब्लिपिड लेयर और ग्लाइकोप्रोटीन से मिल कर बनते हैं। इंवेलप के ऊपर चारो तरफ से स्पाइक्स लगे होतें हैं। इंवेलप वायरस को होस्ट बॉडी के एंटी बॉडी से बचाने का काम करते हैं।

वायरस आकार में काफी छोटे होते हैं। इनका आकार नैनो मीटर में आंका जाता है। मीसल वायरस 220 नैनो मीटर का होता है। वहीं पोलियो वायरस 30 नैनोमीटर का होता है।


वायरस कार्य कैसे करता है?

वायरस जैसे ही किसी होस्ट बॉडी के भीतर एंट्री लेता है। उसके बाद वह होस्ट बॉडी के सेल वाल पर अपने स्पाइक से छेद करता है। तत्पश्चात कैप्सिड अनुवांशिक पदार्थ भीतर छोड़ता है। शरीर के भीतर आते ही, वायरस के अनुवांशिक पदार्थ होस्ट बॉडी के कोशिकाओं पर कार्य करने लगता है। इसके पश्चात वायरस खुद के प्रोटीन सिंथेसिस करने की शुरुवात करते हैं। इसके चलते वायरल पार्टिकल की संख्या बॉडी के भीतर काफी तेज़ी से बढ़ने लगती है। इस कारण इनकी संख्या शरीर में काफी ज्यादा हो जाती है। जब कोई संक्रमित व्यक्ति खास्ता या छींकता है, तब उसके शरीर से निकल कर ये वायरस बाहर आ जाते हैं। ये प्रक्रिया ऐसे ही चलती है।


वायरस के प्रकार

मुख्य रूप से वायरस तीन प्रकार के होते हैं-

1 जंतु वायरस - इनका अनुवांशिक पदार्थ डीएनए और आर.एन.ए होता है। मम्पज वायरस और इन्फ्लूएंजा वायरस इसके प्रमुख उदाहरण हैं।

2 जीवनभोजी वायरस - इस प्रकार के वायरस का अनुवांशिक पदार्थ डीएनए होता है। टी-2 फेज इसका प्रमुख उदाहरण है।

3 पादप वायरस - इसका अनुवांशिक पदार्थ आर.एन.ए होता है। टी.एम.वी वायरस इसका प्रमुख उदाहरण है।

वायरस से होने वाले रोग

वायरस शारीरिक स्वास्थ्य के लिए काफी हानिकारक होते हैं। इनसे विभिन्न प्रकार के रोग जन्म लेते हैं-

1 एच.आई.वी
2 पोलियो
3 मीजल्स
4 रेबिज
5 इन्फ्लूएंजा
6 प्लेग
7 कोविड 19
8 इबोला
9 जीका
10 चिकन पॉक्स आदि

एच.आई.वी जैसे कई वायरस ऐसे हैं, जिनकी वैक्सीन अब तक खोजी नहीं जा सकी है।


वायरस के संक्रमण से कैसे बचा जा सकता है?

वायरस से लड़ने के लिए सबसे बड़ा हथियार शरीर की रोगप्रतिरोधक क्षमता होती है। वायरस से शरीर को बचाने के लिए रोगप्रतिरोधक क्षमता मोर्चा सम्भालती है। इस कारण शरीर की रोगप्रतिरोधक शक्ति मजबूत होनी चाहिए। निम्नलिखित उपायों को अपना कर आप अपने शरीर की रोगप्रतिरोधक क्षमता में वृद्धि कर सकते हैं। -

1 नियमित तौर पर पोषक तत्वों का सेवन करें।

2 फल और सब्जियों के भीतर भरपूर एन्टीओक्सिडेंट होते हैं, जो शरीर की इम्युनिटी पावर को बूस्ट करने का काम करते हैं।

3 गिलोय रस का सेवन करते रहें। इसके भीतर काफी लाभकारी गुण छिपे होते हैं।

4 रोज सुबह योग और व्यायाम करें। योग के दौरान शरीर के भीतर एन्टी बॉडी का निर्माण होता है। शरीर के भीतर जितनी ज्यादा एन्टी बॉडी होगी, उतने ही दूर बीमारियां होंगी।

5 स्वस्थ जीवन शैली को अपनाएं। सुबह जल्दी उठने की और रात में जल्दी सो जाने की आदत बनाएं।

6 मानसिक तनाव को खुद पर हावी न होने दें। मानसिक तनाव शरीर के ऊपर नकारात्मक प्रभाव डालता है। इसके चलते बीमारियों का शरीर पर हावी होने का खतरा बढ़ जाता है।

7 वायरस जब एक महामारी का रूप ले लेता है। तब उससे बचाव हेतु शोध करके वैक्सीन बनाई जाती है। इसके बाद हर एक व्यक्ति को जो वायरस से संक्रमित नहीं होता उसे वैक्सीन दी जाती है।

8 वैक्सीनेशन की प्रक्रिया में शरीर के भीतर वायरस डाला जाता है। फर्क बस इतना रहता है कि डाला गया वायरस काफी कमजोर होता है या फिर मृत होता है। इस कारण इसका नकारात्मक प्रभाव शरीर के भीतर नहीं पड़ता। और शरीर वायरस के प्रति इम्यूनड हो जाता है।

9 हाल में आये कोरोना महामारी से पूरा विश्व प्रभावित हुआ है। महामारी को खत्म करने के लिए पूरा विश्व कोरोना की वैक्सीन बनाने की कोशिश कर रहा है। कोरोना महामारी की शुरुवात चीन के वुहान शहर से हुई थी।

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